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Tehzeeb hafi ki all shayari | तहज़ीब हाफी की शायरी

तहज़ीब हाफी सबसे प्रसिद्ध  शायर है  उनकी हर एक शायरी नेचर से  जुडी है और  वो भी नेचर  को बहुत वैल्यू करता है 




शायरियों की बात हो तो तहजीब का ज़रुर  आता है 

तहजीब हाफी एक काफी समय से चर्चा में रहे एक बहुत ही उम्दा कवि है। उनकी शायरी को मेने सबसे पहले status पे देखा था। तब मैं स्वयं उनके शायरी और पोएट्री का fan हो गया हूं।
स्रोत के अनुसार इतना जान पाया हूं के वो पाकिस्तान से है। और अपनी शायरी को लाहौर के मंच से ही पढ़ते है ।

आपने अगर इनके बारे जानने की कोशिश की होगी तो आपको ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई होगी। उसके जीवनी के बारे कुछ भी गूगल पे fact से नही डाल रखा है। 

तहजीब हाफी एक पर्यावरण कवि है। अगर आप उनकी शायरी पे गौर करोगे तो आपको पता चलेगा के उनकी जादतर शायरी में पेड़ पौधों नदी, रेत जंगल और पर्यावरण से संबंधित ही मिलेगा।

इसलिए हमने विचार किया कि इनकी शायरी हमारे पेज के माध्यम से आप लोगो तक पोच पाए । हमने इनकी शायरी के सारे collection को एक ही जगह पर रखा है। ताकि आपको कही और जाके ढूंढना न पड़े । 



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( Read more : - Guljar shayari in hindi )


Best Collection of Tehzeeb Hafi Shayari

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया " तहज़ीब हाफी "


तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया 

इतनी आवाजें  तुझे दीं  कि गला बैठ गया 


यूं नहीं है की फकत में ही उसे चाहता हूँ 

जो भी उस पेड़ की छाव में गया बैठ गया 


Tahzeeb hafi ki shayari in hindi 

इतना मीठा  वो गुस्से भरा लहज़ा मत पूछ 

उस ने जिस जिस को भी जाने का कहा बैठ गया 


अपना लड़ना भी मोहबत है  तुम्हे  इलम  नहीं 

चीखती तुम रही  और मेरा गला बैठ गया 


उस की मर्जी वो जिसे पास बैठा ले अपने 

इस पे क्या लड़ना फलां  मेरी जगह बैठ गया 


बात  दरियाओ की सूरज की न तेरी है यहाँ 

दो कदम जो भी मेरे साथ चला बैठ गया 


Tehzeeb hafi shayari in hind

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तू  तीर है तो मेरे कलेजे के पर हो  "तहज़ीब हाफी "


जो तेरे साथ रहते हुए  सोगवार हो,

लानत हो ऐसे शख्स पे और बेशुमार हो | 


और अब इतनी देर भी न लगा , ये हो न कही 

तू आ चूका हो और तेरा इंतेज़ार हो 


Ishq par tahzeeb hafi shayari

मैं फूल हूँ तो तेरे बालो में क्यों नहीं  हूँ 

तू तीर है तो मेरे कलेजे के पर हो 


एक  आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर 

हाफी  तुम आदमी तो बहुत शानदार हो 



तू हमें चूमता था "तहज़ीब हाफी" 

Tahzeeb hafi shayari in hindi


जहन पर जोर देने से भी याद नहीं आता की हम क्या देखते थे  

सिर्फ इतना पता है की हम आम लोगो से बिलकुल जुड़ा देखते थे 


तब हमे अपने पुरखो से विरसे में आई हुई बदुआ याद आयी 

जब कभी अपनी आँखों  के आगे तुझे  शहर जाता हुआ देखते थे  


Tahzeeb hafi all shayari in hindi 

सच  बताए तो तेरी मोहबबत ने खुद पर तवज्जों  दिलाई हमारी 

तु  हमे चूमता था तो घर  जाकर हम  आइना  देखते थे 


 सारा दिन रेत  के घर बनते हुए और गिरते हुए बीत जाता 

शाम होते ही हम दूरबीनो में अपनी छतो से खुदा देखते थे 


उस लड़ाई में दोनों तरफ कुछ सिपाही   थे जो नींद में बोलते थे 

जंग टलती नहीं थी सिरों से मगर ख्वाब में फखत देखते थे 


दोस्त किसको पता है की वक़्त उसकी आँखों से फिर किस तरह पेश आया 

हम इकठा थे हस्ते थे एक दूसरे को बड़ा देखते थे | 


वो जुल्फ सिर्फ मेरे हाथ से सवरनी  है "तहज़ीब हाफी"

Tahzeeb hafi shayari 


न   नींद और न ख्वाबो से आंख भरनी है 

की उस से हम ने तुझे देखने की करनी है 


किसी दरख़्त  की हिद्त  में दिन गुजरना है 

किसी चिराग की छाव में रात करनी है 


वो  फूल और किसी शाख पर नहीं  खिलता 

वो जुल्फ सिर्फ मेरे हाथ से सवरनी  है 


तमाम नाखुदा  साहिल से दूर हो जाए 

समुन्द्रो से अकेले में बात करनी है 


हमारे गांव का हर फूल मरने वाला है 

अब उस गली से वो खुशबू नहीं गुजरती है 


दिया जले -"तहज़ीब हाफी"

Diya jale- tahzeeb hafi shayari

तारीकियों को आग लेंगे और दिया जले 

ये रात बैन करती रहे और दिया जले 


उसकी जबान में इतने असर है की निशब्द 

वो रोशनी की बात करे और दिया जले 


तुम चाहते  हो की तुमसे बिछड़ के खुश रहूँ 

यानि हवा भी चलती रहे  दिया जले 


क्या मुझको भी अजीज है तुमको  लौ 

फिर तो मेरा मजार बने  दीया  जले 


सूरज तो मेरी आंख से आगे की चीज़ है 

मै चाहता हु शाम ढले और दीया जले  | 


अगर  कभी तेरे नाम पर जंग हो गयी तो "तहज़ीब हाफी"

जंग  ho gayi - tahzeeb hafi shayari


उसी जगह  पर जहा कई रस्ते मिलेंगे 

पलट के आए तो सबसे पहले तुझे मिलेंग 


अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गयी तो 

हम ऐसे बुजदिल भी पहले साफ में खड़े मिलेंगे 


तुझे ये सड़के मेरे तवस्सुत  से जानती है 

तुझे हमेशा  ये सब इशारे खुले मिलेंगे 


ये किस तरह का ताल्लुक है "तहज़ीब हाफी"


ये किस तरह का ताल्लुक है  आपका मेरे साथ 

मुझे ही छोड़ जाने का मश्वरा मेरे साथ 


यही  कही हमें रास्तो ने बदुआ दी थी 

मगर में भूल  गया और कौन था  मेरे साथ  


वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है 

तुझे यकीन नहीं रहा  तो आ मेरे साथ 


कुछ और  शायरी  तहज़ीब  हाफि 


यार ये कैसा महबूब है – Tehzeeb Hafi Shayari


घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा

जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा।


रात के तीन बजने को हैं, यार ये कैसा महबूब है?

जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा।


उसके घर का पता जानते हो – तहज़ीब हाफी


Viral  शायरी तहज़ीब हाफि ( tehzeeb hafi shayari )


गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ

नये मकान में खिड़की नहीं बनाऊंगा।


फरेब दे कर तेरा जिस्म जीत लूँ लेकिन

मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊंगा।


Tehzeeb hafi sher in hindi 


अपना ''लड़ना' भी मोहोब्बत है तुम्हे__इल्म नहीं, 

चीखती तुम रही और मेरा #गला बैठ गया। 


"Sab thik hai" तहजीब हाफी शेरो शायरी इन हिंदी


साख से पत्ता #गिरे, बारिश रुके, _बादल छटे,

मै ही तो सब_गलत करता हूँ 'अच्छा' ठीक है


तहजीब hafi शायरी इन hindi


उस_लड़की से बस इतना रिश्ता है, 

मिल जाए तो बात #वगैरह करती है, 


Tahzeeb hafi shayari in hindi


हम एक उम्र इसी गम में मुब्तला रहे थे

वो #सान्हे ही नहीं थे जो पेश आ रहे थे। 


तहजीब hafi shayari

सच बताएं तो तेरी मोहब्बत ने खुद पर तवज्जो दिलाई हमारी,

तू हमें चूमता था तो घर जाकर हम देर तक आईना देखते थे। 


Diwana bana dete - hafi shayari


तुझे भी अपने साथ रखता और उसे भी अपना दीवाना बना लेता,

अगर मैं चाहता तो दिल में कोई चोर दरवाज़ा बना लेता। 


मैं अपने ख्वाब पूरे कर के खुश हूँ पर ये पछतावा नहीं जाता,

के मुस्तक़बिल बनाने से तो अच्छा था तुझे अपना बना लेता..। 


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